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#कबीरसाहेब_की_पहचानगरीब, सौ छल छिद्र मैं करूं, अपने जन के काज। हिरणाकुश ज्यूं मार हूँ, नरसिंघ धरहूँ साज।।संत गरीबदास जी ने बताया है कि परमेश्वर कबीर जी कहते हैं कि जो मेरी शरण में किसी जन्म में आया है, मुक्त नहीं हो पाया, मैं उसको मुक्त करने के लिए कुछ भी लीला कर देता हूँ। जैसे सतयुग में प्रहलाद भक्त की रक्षा के लिए नरसिंह रूप धारण करके हिरण्यकशिपु को मारा था।
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