पितरों का उद्धार कैसे संभव है?🌹🌹🌹🍀🍀🍀🎋🎋🎋मरने के बाद की जाने वाली सारी क्रियाएं भूत पूजा में आती है जैसे श्राद्ध, पिण्डोदक, अस्थियाँ विसर्जन, बारहवीं, तेरहवीं, छमाही आदि। यह क्रिया भूत पूजा में आती है और भूत पूजने वाले मृत्यु उपरांत भूत प्रेत की योनि प्राप्त करते हैं।श्राद्ध पूजा शास्त्र विरुद्ध साधना है। पवित्र गीता अध्याय 16 श्लोक 23-24 में गीता ज्ञान दाता कहता है कि जो मनुष्य शास्त्र विधि त्याग कर मनमाना आचरण करते हैं वे न तो सुख को प्राप्त करते हैं न परमगति को तथा न ही कोई कार्य सिद्ध करने वाली सिद्धि को ही प्राप्त करते हैं अर्थात् जीवन व्यर्थ कर जाते हैं।मार्कण्डेय पुराण (गीता प्रेस गोरखपुर से प्रकाशित पृष्ठ 237) में श्राद्ध के विषय मे एक कथा का वर्णन मिलता है जिसमें रूची नामक एक ऋषि को अपने चार पूर्वज जो शास्त्र विरुद्ध साधना करके पितर बने हुए थे तथा कष्ट भोग रहे थे, दिखाई दिए। “पितरों ने कहा कि बेटा रूची हमारे श्राद्ध निकाल, हम दुःखी हो रहे हैं।" रूची ऋषि ने जवाब दिया कि पितामहो वेद में कर्म काण्ड मार्ग (श्राद्ध, पिण्ड भरवाना आदि) को मूर्खों की साधना कहा है, अर्थात् यह क्रिया व्यर्थ व शास्त्र विरुद्ध है।परमेश्वर कबीर जी ने शास्त्र विरुद्ध क्रियाओं के बारे में कहा है कि तत्वज्ञान नेत्रहीन धर्मगुरुओं ने अपने धर्म के शास्त्रों को ठीक से नहीं समझ कर लोक वेद के आधार से मनमानी साधना करा कर हमारे जीवन के साथ खिलवाड़ किया है। गीताजी के अध्याय 9 श्लोक 25 में कहा है कि जो पितर पूजा (श्राद्ध आदि) करते हैं वे मोक्ष प्राप्त नहीं कर पाते, वे यमलोक में पितरों को प्राप्त होते हैं।परमात्मा के संविधान की किसी भी धारा का उल्लंघन कर देने पर सजा अवश्य मिलेगी। पवित्र गीता जी व पवित्र चारों वेदों में वर्णित व वर्जित विधि के विपरीत साधना करना व्यर्थ है। गीताजी के अध्याय 9 श्लोक 25 में कहा है कि जो पितर पूजा (श्राद्ध आदि) करते हैं वे मोक्ष प्राप्त नहीं कर पाते।"कबीर भक्ति बीज जो होये हंसा, तारूं तास के एक्कोतर बंशा"श्राद्ध आदि निकालना शास्त्र विरुद्ध है, सत्य शास्त्रोक्त साधना करने वाले साधक की 101 पीढ़ी पार होती हैं। सत्य शास्त्रानुसार साधना केवल तत्वदर्शी सन्त दे सकता है जिसकी शरण में जाने के लिए गीता अध्याय 4 श्लोक 34 में कहा गया है। पूर्ण तत्वदर्शी सन्त की शरण में रहकर पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब की सतभक्ति करने से न केवल स्वास्थ्य लाभ, आर्थिक लाभ एवं आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं बल्कि भूत प्रेतों एवं पितर दोष आदि से मुक्ति मिलती है। भक्ति करने वाले साधक के सर्व पापों का नाश हो जाता है एवं उसकी 101 पीढ़ी का उद्धार होता हैं यह पितर तर्पण की सर्वोत्तम विधि है। वर्तमान में पूर्ण तत्वदर्शी सन्त हैं, संत रामपाल जी महाराज।श्राद्ध करने की श्रेष्ठ विधिश्री विष्णु श्री विष्णु पुराण के तीसरे अंश में अध्याय 15 श्लोक 55-56 प्रश्न 153 पर लिखा है कि श्राद्ध के भोज में यदि एक योगी यानी शास्त्रोक्त साधक को भोजन करवाया जाए तो श्राद्ध में आए हजार ब्राह्मणों तथा यजमान के पूरे परिवार सहित तथा सर्व पितरों का उद्धार कर देता है।किसी के मरने के बाद श्राद्ध निकालने से अच्छा है उसको जीते जी ज़िन्दगी रहते पूर्ण सन्त से उपदेश दिलवा दे और स्वयं भी शास्त्रानुकूल सत भक्ति कीजिए जिससे आपका पूर्ण मोक्ष होगा और पूर्वजों का भी इसी भक्ति से कल्याण होगा।#श्राद्ध_शास्त्रविरुद्ध_साधना#KabirIsGod #SaintRampalJi अधिक जानकारी के लिए "Sant Rampal Ji Maharaj" YouTube Channel Visit करें।

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