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#GodNightTuesdayअध्याय 16 श्लोक 23जो साधक शास्त्रविधि को त्यागकर अपनी इच्छा से मनमाना आचरण करता है यानि शास्त्र वर्णित साधना मंत्र के अतिरिक्त अन्य नाम जाप करता है। अन्य साधना शास्त्रविरूद्ध करता है, वह न सिद्धी को प्राप्त होता है, न उसे कोई सुख प्राप्त होता है, न उसकी गति यानि मुक्ति होती है।
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